सीआईआई एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0 का उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने किया शुभारंभ
एमएसएमई छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की मजबूत आधारशिला : उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

250 से अधिक उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर हुआ मंथन
नवाचार, तकनीक, वित्त और बेहतर कारोबारी वातावरण के जरिए एमएसएमई को सशक्त बनाने पर जोर
रायपुर, 29 सितंबर 2026/ राजधानी रायपुर में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) छत्तीसगढ़ राज्य परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय एमएसएमई कॉन्क्लेव 2.0 का सोमवार को उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने शुभारंभ किया। “नवाचार एवं सतत औद्योगिक विकास द्वारा एमएसएमई का सशक्तिकरण” विषय पर आयोजित कॉन्क्लेव के पहले दिन 250 से अधिक उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, वित्तपोषण, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कॉन्क्लेव का उद्घाटन सत्र में उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और आर्थिक विकास में छोटे उद्योगों, कारखानों और कार्यशालाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। एमएसएमई के विकास के लिए बेहतर कानून-व्यवस्था, सुगम सड़क संपर्क और त्वरित स्वीकृतियां आवश्यक हैं। राज्य सरकार इन तीनों क्षेत्रों में बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इसके लिए शासन द्वारा उद्योग नीति बनाई गई है जिसमें एमएसएमई के साथ समावेशी विकास दिखाई देता है।
उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य की औद्योगिक विकास नीति के केंद्र में एमएसएमई है। सरकार का प्रयास है कि बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों के उद्यमियों को भी उद्योग स्थापना और संचालन से संबंधित सेवाएं उतनी ही सहजता और तेजी से मिलें, जितनी राजधानी रायपुर में उपलब्ध हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में तैयार भूमि और प्लग-एंड-प्ले अधोसंरचना विकसित होने से छोटी औद्योगिक इकाइयों को तेजी से उत्पादन शुरू करने में मदद मिलेगी।
एमएसएमई राज्य की औद्योगिक मूल्य-श्रृंखला की रीढ़
सीआईआई छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के चेयरमैन एवं श्री बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड के निदेशक श्री बजरंग गोयल ने एमएसएमई को राज्य की औद्योगिक मूल्य-श्रृंखला की रीढ़ बताते हुए कहा कि सीआईआई उद्योग और शासन के बीच सेतु के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
सीआईआई छत्तीसगढ़ एमएसएमई पैनल के संयोजक एवं आरती स्पंज एंड पावर लिमिटेड के निदेशक श्री आदित्य मूंदड़ा ने विषय प्रवर्तन करते हुए तकनीक, वित्त और अनुपालन सुधार को एमएसएमई के विकास के तीन महत्वपूर्ण आधार बताया। सीआईआई छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के वाइस चेयरमैन एवं अविनाश ग्रुप के प्रबंध निदेशक श्री आनंद सिंघानिया ने आभार व्यक्त किया।
वित्त पोषण और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर विशेष चर्चा
“एमएसएमई विकास का वित्त पोषण” विषय पर आयोजित सत्र में भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री विनम्र मिश्रा ने एमएसएमई क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक 7.3 करोड़ से अधिक उद्यम पंजीयन हो चुके हैं तथा क्रेडिट गारंटी योजना में एक करोड़ गारंटी का आंकड़ा पार किया जा चुका है। उन्होंने अप्रैल 2025 से लागू संशोधित एमएसएमई वर्गीकरण सीमाओं के संबंध में भी जानकारी दी।
“एमएसएमई विकास हेतु ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर उद्योग दृष्टिकोण” सत्र में उद्योग संचालनालय, छत्तीसगढ़ शासन के संचालक श्री प्रभात मलिक ने राज्य में सिंगल-विंडो प्रणाली, समयबद्ध स्वीकृतियों और अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रश्नोत्तर के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने स्वीकृतियों की समय-सीमा, निरीक्षण, भूमि आवंटन और विलंबित भुगतान सहित विभिन्न व्यावहारिक विषयों पर चर्चा की।
सत्र में क्रेडाई के अध्यक्ष श्री पंकज लाहोटी, ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (आरएडीए) के अध्यक्ष श्री कैलाश खेमानी तथा छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्री सतीश थौरानी ने उद्योग जगत से जुड़े व्यावहारिक सुझाव रखे। कॉन्क्लेव से प्राप्त प्रमुख सुझावों को सीआईआई द्वारा राज्य शासन को सौंपा जाएगा।
[12:33 pm, 29/09/2026] +91 94252 85626: एआई से लेकर बड़े कॉर्पोरेट बनने की यात्रा तक हुआ मंथन
कॉन्क्लेव में “एआई एडवांटेज” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन सीआईआई छत्तीसगढ़ एमएसएमई पैनल के सह-संयोजक एवं रायपैसा एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्री इरफान बुखारी ने किया। इसके साथ ही “एसएमई से बड़े कॉर्पोरेट तक की यात्रा” विषय पर सीईओ राउंड टेबल में उद्यमों के विस्तार, प्रबंधन और विकास से जुड़े अनुभव साझा किए गए। समापन वक्तव्य सीआईआई छत्तीसगढ़ एमएसएमई पैनल के सह-संयोजक एवं सत्यम एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक श्री रोमिल राठी ने दिया।
कॉन्क्लेव का दूसरा दिन एमएसएमई पेशेवरों के व्यावहारिक क्षमता निर्माण पर केंद्रित रहेगा। इसमें टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (टीपीएम) पर प्रशिक्षण के माध्यम से उपकरणों की दक्षता बढ़ाने और डाउनटाइम कम करने के उपाय बताए जाएंगे। इसके बाद “काइजेन विद एआई” सत्र में शॉप-फ्लोर पर निरंतर सुधार और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी जाएगी।
[2:03 pm, 29/09/2026] +91 94252 85626: बदलते बस्तर की कहानी: दिल्ली के 43 इंफ्लुएंसर्स ने नेतानार में देखी शांति, आत्मनिर्भरता और विकास की तस्वीर
नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकलकर नई राह पर बढ़ रहा बस्तर, महिलाओं के हाथों में हुनर और आंखों में आत्मनिर्भरता का विश्वास
रायपुर, 29 सितंबर 2026। कभी नक्सल हिंसा और भय की खबरों के कारण देश के सामने एक अलग पहचान रखने वाला बस्तर अब बदलाव की नई कहानी लिख रहा है। इस बदलाव को करीब से देखने और समझने के लिए दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने बस्तर का भ्रमण किया। उनके कैमरों ने इस बार बस्तर के जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ उस सामाजिक बदलाव को भी दर्ज किया, जहां शांति के साथ विकास और आत्मनिर्भरता की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं।
बस्तर भ्रमण के दौरान दिल्ली से आए इंफ्लुएंसर्स नेतानार स्थित शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा पहुंचे। यहां उन्होंने स्थानीय स्तर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित सिलाई-कढ़ाई एवं अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को करीब से देखा। प्रशिक्षण केंद्र में चलती सिलाई मशीनों की आवाज उनके लिए बदलते बस्तर की एक ऐसी तस्वीर थी, जिसमें संघर्ष की जगह हुनर, भय की जगह भरोसा और निर्भरता की जगह आत्मनिर्भरता दिखाई दे रही थी।
महिलाओं के हाथों में हुनर, परिवार की अर्थव्यवस्था मजबूत करने की पहल
नेतानार में महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सहित विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उद्देश्य है कि स्थानीय महिलाएं अपने हुनर को रोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनें और परिवार की आय में योगदान दे सकें। इंफ्लुएंसर्स ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं से सीधे संवाद किया। उन्होंने महिलाओं के अनुभव, प्रशिक्षण से मिले अवसर और स्वरोजगार से जुड़ने के बाद आए बदलावों को जाना। कई महिलाओं के लिए हुनर सीखना केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इन महिलाओं की कहानी में बस्तर के बदलते सामाजिक परिवेश की झलक भी दिखाई देती है। जिस क्षेत्र की चर्चा कभी हिंसा और भय के संदर्भ में होती थी, वहीं अब महिलाओं के हाथों में रोजगार का हुनर और भविष्य को लेकर नई उम्मीद दिखाई दे रही है।
शहीद वीर गुंडाधुर की ऐतिहासिक विरासत से भी हुए परिचित
नेतानार पहुंचने वाले इंफ्लुएंसर्स ने केवल वर्तमान को नहीं देखा, बल्कि बस्तर के इतिहास और उसकी गौरवशाली विरासत को भी समझा। उन्होंने शहीद वीर गुंडाधुर के जीवन, उनके योगदान और बस्तर के इतिहास में उनके महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की।
ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान विकास की यह तस्वीर उनके लिए बस्तर को समझने का अलग अनुभव रहा। एक ओर जहां नेतानार की धरती बस्तर के इतिहास और जननायकों की स्मृतियों को संजोए हुए है, वहीं दूसरी ओर यहां महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की गतिविधियां वर्तमान समय में बदलाव की कहानी कह रही हैं।
नकारात्मक छवि से आगे बढ़ता बस्तर
देश के बड़े शहरों से आने वाले डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बस्तर का यह अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्होंने क्षेत्र को केवल सुनी-सुनाई बातों या पुरानी खबरों के माध्यम से नहीं, बल्कि जमीन पर पहुंचकर देखा।
भ्रमण के दौरान उन्होंने बस्तर में शांति और विकास के साथ बदलते जनजीवन के विभिन्न पहलुओं को करीब से समझा। स्थानीय लोगों से संवाद, महिलाओं की स्वरोजगार गतिविधियां, ऐतिहासिक विरासत और क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक पहचान ने उन्हें बस्तर की बहुआयामी तस्वीर से परिचित कराया।
अब कैमरों में कैद होगी बस्तर के बदलाव की कहानी
दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स इस पूरे अनुभव को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाएंगे। उनके कंटेंट में बस्तर के पर्यटन स्थलों के साथ स्थानीय संस्कृति, इतिहास, लोगों के जीवन और बदलते सामाजिक परिवेश की झलक भी दिखाई देगी।
डिजिटल युग में किसी क्षेत्र की पहचान केवल पारंपरिक मीडिया से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और कंटेंट क्रिएटर्स के अनुभवों से भी बनती है। ऐसे में बस्तर के प्रत्यक्ष अनुभवों पर आधारित डिजिटल कहानियां देश के उन लोगों तक भी पहुंच सकती हैं, जिन्होंने अब तक बस्तर को केवल नक्सलवाद से जुड़ी खबरों के माध्यम से जाना है।
बस्तर की नई पहचान – शांति, संस्कृति, पर्यटन और आत्मनिर्भरता
बस्तर की कहानी अब केवल उसके कठिन अतीत तक सीमित नहीं है। यह क्षेत्र अपनी आदिवासी संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय प्रतिभाओं के साथ विकास की नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहा है। नेतानार में महिलाओं का हुनर इसी परिवर्तन का एक मानवीय चेहरा है।
दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स का यह भ्रमण इसी बदलते बस्तर को करीब से देखने का अनुभव है। उनके कैमरों में कैद तस्वीरों में जहां बस्तर की ऐतिहासिक विरासत दिखाई दे रही है, वहीं महिलाओं के हाथों में चलती सिलाई मशीनें उस नए बस्तर की कहानी भी कह रही है, जो शांति के वातावरण में आत्मनिर्भरता और विकास की नई राह तलाश रहा है।
बस्तर के लिए यह बदलाव केवल एक नई खबर नहीं, बल्कि एक नई पहचान गढ़ने की प्रक्रिया है। ऐसी पहचान जिसमें इतिहास की विरासत, संस्कृति की समृद्धि, प्रकृति की खूबसूरती, शांति का वातावरण और आत्मनिर्भरता की उम्मीद एक साथ दिखाई देती है।




